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Aisa Bhi Ho Sakta Hai | Balli Singh Cheema

Aisa Bhi Ho Sakta Hai | Balli Singh Cheema2. Sept.2 Min.

ऐसा भी हो सकता है |  बल्ली सिंह चीमा

साज़िश में वो ख़ुद शामिल हो, ऐसा भी हो सकता है,

मरने वाला ही क़ातिल हो, ऐसा भी हो सकता है ।

आज तुम्हारी मंज़िल हूँ मैं, मेरी मंज़िल और कोई,

कल को अपनी इक मंज़िल हो, ऐसा भी हो सकता है ।

साहिल की चाहत है लेकिन, तैर रहा हूँ बीचों-बीच,

मंझधारों में ही साहिल हो, ऐसा भी हो सकता है ।

तेरे दिल की धडकन मुझको लगे है अपनी-अपनी-सी,

तेरा दिल ही मेरा दिल हो, ऐसा भी हो सकता है ।

जीवन भर भटका हूँ ‘बल्ली’, मंज़िल हाथ नहीं आई,

मेरे पैरों में मंज़िल हो ऐसा भी हो सकता है ।