Pratidin Ek Kavita

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Main Duniya Ki Haqeeqat Jaanta Hun | Naqsh Lyallpuri

Main Duniya Ki Haqeeqat Jaanta Hun | Naqsh Lyallpuri6. Sept.3 Min.

मैं दुनिया की हक़ीक़त जानता हूँ | नक़्श लायलपुरी

मैं दुनिया की हक़ीक़त जानता हूँ

किसे मिलती है शोहरत जानता हूँ

मिरी पहचान है शे'र-ओ-सुख़न से

मैं अपनी क़द्र-ओ-क़ीमत जानता हूँ

तेरी यादें हैं शब-बेदारियाँ हैं

है आँखों को शिकायत जानता हूँ

मैं रुस्वा हो गया हूँ शहर-भर में

मगर किस की बदौलत जानता हूँ

ग़ज़ल फूलों सी दिल सहराओं जैसा

मैं अहल-ए-फ़न की हालत जानता हूँ

तड़प कर और तड़पाएगी मुझ को