Pratidin Ek Kavita

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Prem Ki Anivaaryata | Hemant Deolekar

Prem Ki Anivaaryata | Hemant Deolekar7 oct2 min

प्रेम की अनिवार्थता ।  हेमंत देवलेकर

बहुत असंभव-से आविष्कार किए प्रेम ने

और अंततः हमें मनुष्य बनाया

लेकिन अस्वीकार की गहरी पीड़ा

उस प्रेम के हर उपकार का

ध्वंस करने पर तुली

दिया जिसने

सब कुछ न्यौछावर कर देने का भोलापन,

तर्क न करने की सहजता

और रोने की मानवीय उपलब्धि

प्रेम ने हमारी ऊबड़ - खाबड़, जाहिल-सी

भाषा को कविता की कला सिखाई