
← DHADKANE MERI SUN25 août · 22 min
TERA - MERA HAI PYAAR AMAR
TERA - MERA HAI PYAAR AMAR
तू वो ग़ज़ल है मेरी
जिसमें तेरा होना तय है
तू वो नज्म है मेरी
जिसमें आज भी तेरी मौजूदगी तय है
इसलिये नहीं... कि...
तू मेरी दस्तरस में है
बल्कि इसलिये...कि...
तू आज भी मेरी नस - नस में है
इसलिए हो चाहे ये कितना ही लंबा सफ़र
ना थकेगा ना रुकेगा ये कारवाँ
ना छूटेगी ये डगर
क्यों कि...