
← Pratidin Ek Kavita8 okt · 2 min
Buri Aurat Ke Sapnon Mein | Kailash Manhar
Buri Aurat Ke Sapnon Mein | Kailash Manhar
बुरी औरत के सपनों में । कैलाश मनहर
बुरी औरत के सपनों में
नहीं होता पति और चरित्र और मर्यादाएँ
बन्द खिड़कियों वाला पिंजरेनुमा घर
बुरी औरत के सपनों में नहीं होती
बदन को धरती बनाकर
धान कुटवाने वाली निर्जीव सहन-शक्ति
बचपन के प्रेम को भूल जाने वाला
परिवार की प्रतिष्ठा के नाम का
पाखण्ड-पर्व
कभी नहीं होता बुरी औरत के सपनों में
दुनियादारी के घुटते हुए अँधेरे की