Pratidin Ek Kavita

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Ek Baar | Rajula Shah

Ek Baar | Rajula Shah11 okt2 min

एक बार । राजुला शाह

बह जाने देना

उड़ जाने देना

अपने आप को

एक बार

तुम भी।

गुब्बारे-सा

हवा के बुलबुले-सा

हल्का होगा तुम्हारा मन

और कहीं भी जा सकेगा

बिला रोक-टोक

फिर-