
← Pratidin Ek Kavita2 okt · 2 min
Pyaar | Sarveshwar Dayal Saxena
Pyaar | Sarveshwar Dayal Saxena
प्यार । सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
इस पेड में
कल जहाँ पत्तियाँ थीं
आज वहाँ फूल हैं
जहाँ फूल थे
वहाँ फल हैं
जहाँ फल थे
वहाँ संगीत के
तमाम निर्झर झर रहे हैं
उन निर्झरों में
जहाँ शिला खंड थे
वहाँ चाँद तारे हैं