
← Pratidin Ek Kavita7 sep · 2 min
Bhram | Sushma Kumari
Bhram | Sushma Kumari
भ्रम । सुषमा कुमारी
आसमान में अब बादल नहीं दिखता
दिखता है बादल के होने का एक भ्रम
पेड़ों पर अब चिड़ियाँ नहीं रहती
रहता है उनके होने का एक भ्रम।
फूर्लों पर अब मधुमक्खियाँ नहीं होतीं
और सड़कों पर अब नहीं होते रास्ते!
इसी तरह
जंगल में अब जंगल नहीं बसता
थाली में नहीं होती रोटी
अख़बार में नहीं होता समाचार,
जीवन में नहीं होता प्रेम!