Pratidin Ek Kavita

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Jab Main Thaka Hua Ghar Aaun | Shakunt Mathur

Jab Main Thaka Hua Ghar Aaun | Shakunt Mathur9 Sept2 min

जब मैं थका हुआ घर आऊँ । शकुन्त माथुर

जब मैं थका हुआ घर आऊँ,

तुम सुन्दर हो घर सुन्दर हो।

चाहे दिन भर बहें पसीने

कितने भी हों कपड़े सीने

बच्चा भी रोता हो गीला

आलू भी हो आधा छीला

जब मैं थका हुआ घर आऊँ,

तुम सुन्दर हो घर सुन्दर हो

सब तूफ़ान रुके हों घर के

मुझको देखो आँखें भर के

ना जूड़े में फूल सजाए