Pratidin Ek Kavita

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Nayi Sanskriti | Doodhnath Singh

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नई संस्कृति । दूधनाथ सिंह

आसमान में बसा हुआ नगर

निर्वसन हवा को नींव में चुनवा कर,

आपस में टकराते, जूझते

मकान।

बँधे हुए कुत्तों का मुँह नोचते व्यवसायी

जूतों के तल्लों में सोना चिपकाए

कंधों पर लादे—

मसान।

बेतहाशा भागती हुई भीड़

अमर-बेलि की काली लतरों पर,

और दुहरे चुटीले अँधेरे में गुँथे हुए