Pratidin Ek Kavita

← Pratidin Ek Kavita2 days ago · 3 min

Nayi Sanskriti | Doodhnath Singh

Nayi Sanskriti | Doodhnath Singh2 days ago3 min

नई संस्कृति । दूधनाथ सिंह

आसमान में बसा हुआ नगर

निर्वसन हवा को नींव में चुनवा कर,

आपस में टकराते, जूझते

मकान।

बँधे हुए कुत्तों का मुँह नोचते व्यवसायी

जूतों के तल्लों में सोना चिपकाए

कंधों पर लादे—

मसान।

बेतहाशा भागती हुई भीड़

अमर-बेलि की काली लतरों पर,

और दुहरे चुटीले अँधेरे में गुँथे हुए